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हसना मना है

10 दिनों के अंदर सिसाय मे लूट की दूसरी वारदात, दुकानदार पर हमला कर लूटे 20 हजार

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसीः 

  पुलिस जिले में लूटपाट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।  सिसाय कालीरमण गांव में बुधवार शाम को एक किरयाणा की दुकान में तोड़फोड़ करते हुए नकाबपोश बाइक सवार 20 हजार की नकदी लूटकर फरार हो गए। सिसाय गांव में दस दिनों के अंदर लूट की यह दूसरी वारदात हुआ है। पुलिस में दी शिकायत में दुकानदार अनूप कुमार ने कहा कि वह अपनी दुकान में बैठा हुआ था। इसी दौरान दो मोटरसाइकिल पर चार लड़के मुंह पर कपड़ा बांधे हुए अपने हाथों में लोहे की रॉड वह डंडा लिए हुए उनकी दुकान के अंदर आए । उन्होंने दुकान में तोड़फोड़ करनी शुरु कर दी है व गल्ले के रुपये व उसके जेब में जो रुपये थे वो भी छीन लिए। दुकानदार ने बताया कि बदमाश करीब 20 हजार रुपये लूटकर फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। बता दें कि सिसाय गांव में इससे पूर्व 22 मई को शराब ठेकेदार की कार पर हमला करके करीब 72 हजार रुपये छीन लिए थे। यह मामला अभी ट्रेस भी नहीं हुआ था कि गांव में एक और लूट की वारदात को बदमाशों ने अंजाम दे दिया है। पुलिस इस मामले में जांच करने में जुटी है।

कौन जीता हांसी के छात्र संघ चुनावों में ,देखिये कौन बना राजकीय और एसडी कालेज का प्रधान

सिटी फर्स्ट न्यूज़ ,हांसी :

हरियाणा में 22 साल बाद बुधवार को छात्र संघ चुनाव हुए । सुबह से 287 कॉलेजों और 11 यूनिवर्सिटी में  बैलेट पेपर से मतदान हुआ । हांसी में कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच दोनों कालेजों में छात्रसंघ चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गये। चुनावों में छात्रों का अधिक रुझान देखने को नहीं मिला। दोनों कालेजों के चुनावों में मुख्य पदों पर अधिकतर साधारण परिवारों के छात्रों ने जीत हासिल की है। चुनावों को लेकर अधिक क्रेज राजकीय कालेज में देखने को मिला। कालेज में सर्वाधिक 60 फीसद छात्रों ने वोट डाले। चुनावों को लेकर छात्रों में इतना उत्साह था कि सुबह आठ बजे ही छात्र कालेज में पहुंच गये। वोटिंग के दौरान एक बार एक बूथ पर छात्रों ने एक सीआर के समर्थन में हूटिंग कर दी। जिस पर पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति पर काबू पाया। बता दें कि चुनावों में कालेजों की चौधर पाने वाले अधिकतर विद्यार्थी ग्रामीण आंचल के हैं।  राजकीय कालेज में प्रधान बने रवि का परिवार खेती से जुड़ा है तो वहीं एसडी कालेज में प्रधान बनी दीपा के पिता की स्पेयर पार्ट की दुकान है।

—–छात्र संघ चुनावों में ये बच्चे जीते —👇

                          सीआर सूची

 

 

 

भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण, विशेष कोर्ट ने भाटला के सरपंच समेत छह लोगों को आरोपी मान किया तलब

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,
उपमंडल के भाटला गांव में पिछले एक साल से चल रहे सामाजिक बहिष्कार के मामले में विशेष कोर्ट ने पुलिस की जांच पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। एसआईटी की जांच में निर्दोष पाए गये सभी छह आरोपितों के खिलाफ कोर्ट ने मुकदमा चलाने के निर्देश शनिवार को दे दिये। एससी-एसटी की विशेष अदालत में अब गांव के सरपंच प्रतिनिधि पुनीत बेरवाल समेत पांच अन्य के खिलाफ अनूसूचित जाति के लोगों का सामाजिक बहिष्कार किये जाने का मामला चलेगा। मामले में आगली सुनवाई अब 31 अगस्त को ही।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 15 जून को गांव भाटला गांव में पानी को लेकर सवर्णों व अनूसूचित जाति के लोगों में विवाद हो गया था। जिसके बाद अनुसूचित जाति के लोगों ने आरोप लगाया था कि गांव के सवर्णों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया है। इस मामले में 10 जुलाई को पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच के लिए एएसपी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। आईपीएस राजेश कुमार ने अपनी जांच में मामले में आरोपित सात ग्रामीणों में से मात्र एक के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। जिसके विरोध में अनुसूचित जाति के के लोगों ने कोर्ट में याचिका दायल की थी। विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए एसआईटी द्वारा निर्दोष पाए गये सरपंच प्रतिनिधित पुनीत बेरवाल, रामचंद्र, लीला, जयकिशन,  सुमेरु पंडित व साधू के खिलाफ भी एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा चलाने के आदेश जारी किये हैं। गौरतलब है कि गांव के पीड़ित अनुसूचित जाति के लोग पिछले काफी  समय से पुलिस का कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते आ रहे हैं और इस बारे में कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत कर चुक हैं।
पहले दी थी गांव से पलयन की चेतावनी अब सरकार से चल रही है सकारात्मक बातचीत
सामाजिक बहिष्कार के चलते भाटला गांव के अनुसूचित जाति के लोगों ने पिछले महीने गांव से पलायन करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद हरकत में आई सरकार ने हिसार के विधायक कमल गुप्ता व अन्य नेताओं को मामले में दोनों पक्षों के बीच सुलाह कराने के लिये भेजा था। पीडि़तों की आगुवाई कर रहे एडवोकेट रजत कल्सन ने कहा कि सरकार से बातचीत चल रही है और सरकार ने उनकी मांगों को मान लेने का आश्वासन दिया है।
पुलिस की कलई खुलकर आ गयी सामने
 एडवोकेट रजत कल्सन ने कहा पुलिस मामले में आरोपित सात लोगों में से छह को निर्दोश बताते हुए जांच में निकाल दिया था। एसआईटी की जांच में भी केवल एक आरोपित के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दायर की गयी। लेकिन हम तब से ही इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते आ रहे थे और अब कोर्ट के आदेशों से भी स्पष्ट हो गया है कि पुलिस ने गलत ढंग से आरोपितों को मामले से बाहर निकाला था। सामाजिक बहिष्कार के आरोपित सभी सात के खिलाफ अब कोर्ट में केस चलेगा।
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