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मोदी सरकार ने स्मृति से छिना सूचना प्रसारण मंत्रालय, गोयल को मिला वित्त मंत्रालय का प्रभार

सिटी फर्स्ट न्यूज़ नई दिल्ली,
2019 में होने वाले चुनावों से पहले मोदी सरकार ने कैबिनेट में फेरबदल किया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार  रेलमंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्री का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे अरुण जेटली की गैरमौजूदगी में मंत्रालय का कामकाज देखेंगे।  स्मृति ईरानी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से हटा दिया गया है। उनकी जगह राज्यवर्धन सिंह राठौर को मंत्रालय में स्वतंत्र राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। बता दे कि अरुण जेटली का सोमवार को ही किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। वे पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही काम पर लौटेंगे।

सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षाओं की डेट शीट जारी की

सिटी फर्स्ट न्यूज़ दिल्ली:

केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षाओं की डेट शीट जारी कर दी है और इसी के साथ छात्रों का लंबा इंतजार खत्म हो गया. सीबीएसई के मुताबिक, दसवीं और 12वीं की परीक्षाएं 5 मार्च से 12 अप्रैल के बीच में आयोजित की जाएंगी. कक्षा दस की परीक्षा 5 मार्च से शुरू होंगी और 4 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी. वहीं, 12वीं की परीक्षा पांच मार्च से लेकर 12 अप्रैल तक आयोजित की जाएंगी.

बता दें कि बोर्ड के अधिकारियों ने पहले कहा था कि डेटशीट की घोषणा जनवरी के पहले सप्ताह में की जाएगी. आपको बता दें कि प्रैक्टिकल एग्‍जाम जनवरी से शुरू होंगे और इसके अंक फरवरी में अपलोड किए जाएंगे.

डेटशीट जारी होने के साथ ही डेटशीट सीबीएसई बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है, जो बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.nic.in और cbseacademic.in है.

बता दें कि पिछले साल 10वीं क्‍लास की बोर्ड परीक्षा 9 मार्च से 10 अप्रैल तक आयोजित की गई थी और कक्षा 12वीं क्‍लास की परीक्षा 9 मार्च से 29 अप्रैल तक आयोजित की गई थीं.

Apani Baat

लखनऊ  आज का “कुरुक्षेत्र” है ,जहाँ सैफई के यदुवंशी आमने -सामने हैं लेकिन इस युद्ध में धृतराष्ट्र (मुलायम सिंह ) संजय से युद्ध क्षेत्र का हाल नहीं सुन रहा है बल्कि खुद वाण -वर्षा कर रहा है | इस महाभारत में जैसा भी है “आज का अर्जुन” अखिलेश है और कृष्ण की भूमिका में चाचा रामगोपाल हैं | दूसरे चाचा शिवपाल दुर्योधन की भूमिका में हैं तो अमर सिंह शकुनि| अर्जुन अर्थात अखिलेश की सौतेली माँ साधना अग्रवाल गांधारी हैं |फिलवक्त ये आधा दर्ज़न पात्र ही दिख सके हैं | वैसे भी हजारों साल बाद महाभारत को जस का तस तो नहीं दोहराया जा सकता लेकिन जो लखनऊ में हो रहा है ,वह केवल नाट्य रूपांतरण भी नहीं है |राज – सत्ता के लिए इस तरह के संघर्ष महाभारत से पहले भी हुए हैं और बाद में भी निरंतर होते रहे हैं | रामायण भी तो असल में सत्ता पुराण ही है | रघुकुल में भी तो कमोबेश  आज
की “सैफई कुल” जैसी ही स्थिति  थी | भारत में राजतन्त्र के दौर में जो कुछ हुआ वह जनतंत्र में भी बरकरार है , यह विडंबना ही है और भारतीय लोकतंत्र के कतई शुभ नहीं कही जा सकती | भारत जब स्वतंत्र हुआ तो देश में तक़रीबन  साढ़े पांच सौ  देसी रियासतें थीं जिनका  लौह पुरुष सरदार पटेल के प्रयासों से भारत में विलय किया गया और एक तरह से हिंदुस्तान से राजशाही को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया लेकिन राजशाही के अवशेष न केवल वे  बने रहे अपितु हमारे लोकतंत्र की कोख से भी अनेक  नए “राजवंश” पैदा हो गए | देश और प्रदेश में ऐसे राजवंशों को
देखा और पहचाना जा सकता है | राष्ट्रीय स्तर पर नेहरु वंश लोकतान्त्रिक वैधता के साथ ही अस्तित्व में आया | प्रदेशों में जो क्षत्रप पैदा  हुए वे भी कालान्तर में राजवंश में ही तब्दील हो गए | शेख अब्दुल्लाह , सिंधिया , देवीलाल , बादल ,ठाकरे , पवार , करूणानिधि , मुलायम और लालू यादव इत्यादि ऐसे ही जनतांत्रिक राजकुल भारत में विद्यमान हैं | अनगिनत ऐसे लघु राजकुल भी देखे जा सकते हैं जिनकी  संसद और विधान मंडलों में तीसरी अथवा चौथी पीढ़ी कुल का प्रतिनिधित्व कर रही है | अब चूँकि छोटे -बड़े हजारों राजकुल हमारे महान लोकतंत्र ने पैदा किये हैं तो ज़ाहिर है कि इनमें कुल के भीतर ही सत्ता -संघर्ष होने हैं | कई कुल ऐसे हैं जिन्होंने बाकायदा राजनीतिक दल स्थापित किये हुए हैं ,जिनमें कहने को तो आंतरिक लोकतंत्र वगैरा है और पूरा संगठन भी मौजूद होता है लेकिन वास्तविक अर्थों में सत्ता पूरी तरह से परिवार विशेष के हाथों में ही होती है | अन्य सभी लोग ,भले ही वे मंत्री ,सांसद , विधायक अथवा किसी
संवैधानिक पदों पर ही क्यों न विराजमान हों , परिवार के नौकर -चाकर जैसे ही होते हैं | इन्हें सभ्य व “लोकतान्त्रिक दास” भी कहा जा सकता है |ऐसे दलों में एक “सुप्रीमो” होता है जिसे परिवार का मुखिया कहा जाता है | गौरतलब है कि ये सुप्रीमो अपनी निजी सियासी पार्टी को भी “परिवार” की ही संज्ञा देते हैं लेकिन यह तथाकथित परिवार सुप्रीमो के अपने जैविक परिवार के आधीन ही होता है | इसमें अन्य सदस्यों का अस्तित्व और हैसियत “साहब ” लोग ही तय करते हैं | तो अब जो कुछ सैफई राजकुल में चल रहा है ,वह पूरी तरह से राज -परिवार पर नियंत्रण की ही कवायद है | जिस किसी के भी हाथों में राज -परिवार का नियंत्रण होगा ,वह व्यक्ति ही बड़े परिवार अर्थात पार्टी का नेतृत्व करेगा
और सत्ता का भी संचालन करेगा | सैफई के यदुवंश में मौजूदा सुप्रीमो “नेता जी” राजसत्ता अर्थात परिवार -सत्ता का बंटवारा अपनी मर्ज़ी से करना चाहते हैं  लेकिन अर्जुन और कृष्ण को लगता है ,और सही ही लगता है कि आज का
धृतराष्ट्र गांधारी , दुर्योधन और शकुनि के हाथों में खेल रहा है | ऐसे षड्यंत्रकारी लोगों से धृतराष्ट्र  व राज-परिवार को बचाने के लिए आज का अर्जुन  कृष्ण के कहने मात्र पर ही गांडीव से वां -वर्षा कर रहा है | उसे सम्पूर्ण गुट -उपदेश की जरूरत भी नहीं है क्योंकि  यह अर्जुन न तो भावुक व  वीतरागी है और न ही अविवेकी बल्कि  वह खुद सत्ता के  प्रचंड मोह से ग्रस्त है  और राजनीति की कुटिल चालों में दक्ष भी है | अंतिम परिणाम अभी शेष है ,इसलिए लखनऊ की  महाभारत पर नज़रें गढ़ाए रखिये !

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