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आडम्बर व झूठे दिखावे से परमात्मा को पाना असंभव: राधवेंद्र

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,
भक्ति के आडम्बर व झूठे दिखावे से परमात्मा को पाना असंभव है यह बात पंचायती रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह के अंतिम दिन कथावाचक राघवेंद्र सरकार ने कथा के दौरान कही। श्री मद्भागवत कथा के समर्पण दिवस के कथा प्रसंगों में कथा व्यास राधवेंद्र सरकार ने श्रीमद्भागवत कथा का समापन करते हुए कई कथाओं का भक्तों को श्रवण कराया जिसमें प्रभु कृष्ण के 16 हजार शादियों के प्रसंग के साथ, सुदामा चरित, और परीक्षित मोक्ष की कथायें सुनाई। इन कथाओं को सुनकर सभी श्रद्वालु भाव विभोर हो गए। कथा समापन के दौरान राधवेंद्र महाराज ने भक्तों को भागवत को अपने जीवन में उतारने की बात कही जिससे सभी लोग धर्म की ओर अग्रसर हो। राघवेंद्र महाराज ने सुदामा चरित्र के माध्यम से श्रद्वालुओं के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। साथ ही  बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने मात्र से भी जीव का उद्धार हो जाता है तो वहीं इसे कराने वालों के पितृ तर जाते है। भागवत कथा का गुरूवार को समापन किया गया। समापन अवसर पर भण्डारे का भी आयोजन किया गया। सुबह हवन-यज्ञ में आहुति डाल कर कथा का समापन करने के बाद भण्डारे का शुभारंभ किया गया।

प्रभु भक्ति में अहंकार है सबसे बड़ी बाधाःराधवेंद्र सरकार

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी ,

प्रभु भक्ति में मनुष्य का अहंकार सबसे बड़ी बाधा है, इस लिए मनुष्य को शांतचित रहकर प्रभु भक्त में लीन रहना चाहिए। यह बात पंचायती रामलीला ग्राउंड में चल रही श्री मद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास राधवेंद्र सरकार ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कामदेव का अहंकार मर्दन, महारास वर्णन, अकरुर को दिव्य रूप से दर्शन मथूरा में धोबी को सदगति, कुबजा पर अनुकंपा करके साहचार्य प्रदान करना, चागुर आदि मल्लों सहित कंस का वध कर उसका उद्दार करना, रूकमणी मंगलोत्वस की कथा के साथ साथ ज्ञानात्मक भजनों के द्वारा संपूर्ण भागवत मंडप में भक्ति की धारा को प्रभावित करके श्रद्धालुओं को अनुग्रहित किया।

महारास कथा में कंदर्प का मर्दन करने की कथा से प्रेरणा प्रदान की गयी कि असद वासना के द्वारा हम अपने आपको भगवान की कृपा से वंचित कर लेते हैं। वहीं दूसरी और  अकरूर की तरह मन पवित्र हो भगवान के चरणों में लगन हो तो परिस्थिति वश हमें ब्रह्म रूप से चाहे कुछ अनिष्ट कार्य करना पड़ भी जाए तो उस समय कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में भगवान स्वयं आपकी सहायता व अनुकंपा करके अपनी उपस्थिति का आभास करवाते हैं। उद्धव की ज्ञानात्मक भक्ति जो गोपियों को सांत्वना देने के लिए बनाई गयी वह भी गोपियों के ह्रदय में बसी हुई उस निष्काम भक्ति के आगे फीकी पड़ गयी। भागवत कथा के दौरान रूकमण और श्री कृष्ण के विवाह की मनोहर झांकी के द्वारा भी भक्तजनों के ह्रदय में श्री श्याम भक्ति जागृत करने के लिए भावों के कपाट उद्धाटित किये गये।

श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी, 
आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञानवुर्ती साध्वी कंचन कुमारी व साध्वी सत्यप्रभा के सान्निध्य में मंगलवार को तेरापंथ भवन में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा के प्रधान प्रीतम जैन ने पद की शपथ ली और प्रीतम जैन ने अपनी कार्यकारिणी में शीतल जैन को सचिव व राहुल जैन को सह सचिव व प्रैस प्रवक्ता, बजरंग जैन  पंसारी व विनोद जैन को उपप्रधान, धनराज जैन को कोषाध्यक्ष नियुक्त कर शपथ दिलाई। इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ सभा, अणुव्रत समिति प्रधान अशोक जैन, आचार्यश्री तुलसी कल्याण केन्द्र प्रधान सुभष जैन माढ़ा वाले, तेरापंथ युवक परिषद प्रधान राहुल जैन व महिला मण्डल प्रधान सरोज जैन, सचिव रमा जैन, सुनीता जैन, मण्डल प्रधान आयुष जैन आदि उपस्थित थे।

निर्मल प्रेम से ही वश में हो जाते है भगवान : राघवेंद्र सरकार

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,
भक्त द्वारा किए गए निष्छल व निर्मल प्रेम के वश में हो जाते हैं भगवान। यह बात पंचायती रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह के पांचवे दिन कथावाचक राघवेंद्र सरकार ने कथा के दौरान कही। उन्होने कहा कि यदि हमें सांसारिक विकारों सेे बचना है तो हमें किसी भी अवस्था या परिस्थिति में हर संभव रूप में ज्यादा से ज्यादा गोबिंद नाम का स्मरण और मनन करना चाहिए। क्योंकि भक्ति मार्ग में यदि मन निर्मल रहेगा तो अधिक विधि विधानों या नियमों की जरूरत नही है।
कथा के पांचवे दिन कथावाचक राघवेंद्र सरकार ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं, पूतना वध, तृषणावर्त वध,गर्गमुनि को दिव्यरूप दर्शन, वकासुर वध आदि की कथाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। सरकार ने कहा कि भगवान के  द्वारा मां यशोदा और नंद बाबा को उनके पूर्व जन्म मे किए पुण्य कर्मो, निष्छल व निर्मल प्रेम के फलस्वरूप बाल लीलाओं के द्वारा आनंद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला था।
वहीं भगवान कृष्ण द्वारा गोपियों के वस्त्र हरण की लीला द्वारा उन्हे मर्यादा का पाठ पढाया गया। और प्रकृति को महत्व देते हुए इन्द्र का मान भंग करते हुए गोवर्धन पर्वत का अपनी कृपा से पुजनीय करवाया।

भागवत कथा में धूमधाम से मनाया कृष्ण जन्मोत्सव

प्रत्येक व्याधी का सर्वोतम उपचार है भागवत भक्ति :राघवेन्द्र सरकार

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,
प्रत्येक व्याधी का सर्वोतम उपचार है भागवत भक्ति, भागवत भगवान की भक्ति से ही मनुष्य के जीवन में आने वाली हर समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है। यह बात पंचायती रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह के चौथे दिन कथा वाचक राघवेंद्र सरकार ने कथा के दौरान कही। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के चतुर्थ दिन गजेन्द्र मोक्ष समुंद्र मंथन, वामन कृपा, मत्स्यावतर, श्रीराम चरित्र और कन्हैया लाल की जन्म कथा का प्रसंग सुनाया। गजेंन्द्र प्रसंग सुनाते हुए कहा किगज और ग्राह लड़े जल भीतर, लड़त-लड़त गज हारा है। भगवान को जब भी विपत्ति में याद किया जाता है तो भक्तों की पुकार सुनकर भगवान को उसकी रक्षा के लिए आना ही पड़ता है। गजेंद्र की रक्षा मगरमच्छ से छुड़ा कर भगवान श्री हरी ने की थी जो प्रभु का परम भक्त था। इस कथा में समुद्र मंथन के साथ-साथ वामन अवतार की कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि अहंकार दुर करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने दैत्यों के राजा प्रहलाद पुत्र बली के पास जाकर वामन अवतार लेकर तीन पैर जमीन मांगकर दो पैर में धरती और आकाश को नाप लिया और इस प्रकार बली का अहंकार दुर कर उसको मोक्ष प्रदान किया। इस दौरान भजन तेरे द्वार खड़ा भगवान, भगत भर दे रे झोली सुनाया। राघवेंद्र सरकार ने भगवान श्रीराम के जन्म की कथा के साथ-साथ कृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में जन्म लेकर अनेक लीलाएं की।
इस दौरान कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। कृष्ण जन्मोत्सव पर पुष्पवर्षा करते हुए गुब्बारें फोड़े गए और मक्खन मिश्री के प्रसाद वितरीत किया गया।

प्रभु नाम के सिमरन मात्र से प्राणी को मिल जाती है पापों से मुक्ति: राघवेंद्र सरकार

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,
प्रभु नाम के सिमरन मात्र से प्राणी को जीव में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए मनुष्य को अपने पाप कर्मो से मुक्ति पाने के लिए प्रभु के नाम का सिमरन अवश्य करना चाहिए। यह बातें पंचायती रामलीला मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह के तीसरे दिन कथावाचक राघवेंद्र सरकार ने कथा के दौरान कही। कथा के दौरान प्रभु नाम के सिमरन मात्र से अपने पाप कर्मो से मुक्ति पाने वाले प्रियव्रत चरित्र, सृष्टि वर्णन, कर्दम, अजामिल उद्धार एवम् भक्त प्रह्लाद का चरित्र सुनाया गया। कथा वाचक राघवेंद्र सरकार ने कहा कि नारायण नाम स्मरण से भक्ति जागृति और उसके प्रभाव से अजामिल जैसे पापी का भी सहज रुप से उद्धार होने का वर्णन किया। किस प्रकार से अंत के समय में राक्षस कुल में उत्पन्न होने पर भी नारायण के पास के परम भक्त प्रहलाद आदि भी कठिन परिस्थितियों में धर्म का साथ रखते हुए उस परम तत्व की कण कण में व्याप्त सत्ता का स्पष्ठ  संदेश देता है। वहीं कथा में ज्ञानात्मक प्रसंगों के साथ साथ भक्ति जागृति को बहुत ही सुंदर भजनों का मधुर गान किया गया। जिनमें भक्तों ने ज्ञान प्राप्त करते हुए भक्ति में झुमते हुए सबके भक्तवत्सल श्री श्याम प्यारे को रिझाने का सुंदर प्रयास किया। इस दौरान भागवतमंडप कन्हैया लाल भगवान के चरणों में खोता हुआ भागवतमय बन गया।
पंचायती रामलीला ग्राऊण्ड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्याम सुंदर बागड़ी एवं मित्तल परिवार के द्वारा करवाया जा रहा है। यह जानकारी देते हुए श्री श्याम मित्र मंड़ल के प्रधान जगदीश राय मित्तल ने बताया कि रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्री लड्डू गोपाल श्रृंगार प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। वहीं रात को श्याम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा। जिसमें इंदौर से पधारी बहन पुष्पा मित्तल का सानिध्य भक्तों को प्राप्त होगा।

बन तितली मैं उड़ दी फिरां किशोरी तेरे बरसाने पर जमकर झूमे श्रद्धालु

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,
तीर्थ स्थान मंदिर श्री लक्ष्मण चौतरा में 61वें बैसाखी मेले का समापन हुआ। इस दौरान लोगों ने चेतंग नहर में बैसाखी स्नान किया। मन्दिर में आयोजित श्री मद्भगवद सप्ताह की पूर्णाहुति दी गयी। बैसाखी मेले पर सुबह 5 बजे से मन्दिर में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग्न शुरू हो गया। मंदिर में सुबह 6 बजे हवन यज्ञ हुआ। इसके बाद सत्संग एवं प्रवचन का आयोजन किया गया। कथा वाचक भागवताचार्य भरत पांडेय ने कहा कि श्रीमदभागवत कथा मनुष्य के जीवन में सुखों का संचय करने वाली होती है। पूरे मनोयोग के साथ कथा श्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन हो सकते हैं। श्रीमद भागवत में तमाम ऐसी कथाएं हैं जो हमें प्रेरणा देती है और कलयुग में जीवन को कलात्मक ढंग से जीने का मार्ग प्रशस्त करती है। मानव जन्म पाकर मनुष्य अमृत पी ले और उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं हो तो उस अमृत पीने का कोई लाभ नहीं। राहु ने भी अमृत पिया और अमर हो गए लेकिन उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं होने के कारण उसे कोई लाभ नहीं मिला। वहीं धुंधकारी जैसे पापी भी कथामृत श्रवण करने मात्र से मोक्ष को प्राप्त किए। भागवत कथा अमृत सामान है तभी मोक्ष प्राप्ति के लिए राजा परीक्षित अपने जीवन के अंतिम सात दिन कथामृत श्रवण कर बिताया और पुण्य के भागी बने और उन्हें भी मोक्ष मिला। अमृत पीने मात्र से कुछ नहीं होता बल्कि अमृतपान से अमरत्व होने के बाद भी हमारे जीवन की सार्थकता जीवमात्र के लिए क्या है, यह महत्वपूर्ण है। इस दौरान सुदामा की झांकी दिखाई गई। बैसाखी मेले के दिन कुरुक्षेत्र से आई भजन गायिका दीक्षा शर्मा ने भजन वर्षा की। उनके भजन बन तितली मैं उड़ दी फिरां किशोरी तेरे बरसाने पर श्रद्धालु जमकर झूमे। मेले के अंत मे भंडारा का आयोजन हुआ।
कर्यक्रम के छठे दिन मुख्य अतिथि रहे गल्फ पेट्रोकेम के चैयरपर्सन अशोक मंगालीवाला ने मन्दिर की गोशाला के लिए बायोगैस व गो अर्क के लिए आधुनिक मशीनें देने की घोषणा की। श्रीमद्भागवत सप्ताह के छठे दिन गल्फ पेट्रोकेम के चैयरपर्सन उद्योगपति अशोक गोयल मंगालीवाला, समाजसेवी विनोद महता, कांग्रेस नेत्री रेणु मक्कड़ मुख्यातिथि रहे। बैसाखी मेले के दिन पूर्व सीपीएस विनोद भयाना के पुत्र साहिल भयाना, उद्योगपति मदनलाल सेठी, एडवोकेट श्यामलाल चौधरी, नवीन ठाकुर, पार्षद अजय सैनी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर बक्शीलाल ठकराल, एडवोकेट सुरेंद्र राजपाल, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के संगठन सचिव रमेश भूटानी, हिन्दू महासभा के प्रधान अनिल चावला, मोहित ठकराल, चन्द्रभान मक्कड़, भाजपा के मंडल अध्यक्ष प्रवीण बंसल, धर्मबीर रतेरिया, बजरंग जैन, नरेश खरडिय़ा, घनश्याम दास गर्ग, पण्डित रतन लाल, चन्द्रभान खरडिया, महेश बांगा, जसवंत वासुदेवा, हिसार की सद्भावना संस्था के अध्यक्ष अमित ग्रोवर आदि उपस्थित रहे।

कौन सी ने मार दियो री टोना, मेरा मचल्यो श्याम सलोना

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,   
तीर्थ स्थान मंदिर श्री लक्ष्मण चौतरा में आयोजित श्रीमद्भगवद सप्ताह के पांचवे दिन गोवर्धन पूजा की गई। इस अवसर पर गोवर्धन भगवान को छप्पन भोग लगाया। वहीं मंदिर परिसर में रुक्मणी विवाह के लिए श्रद्धालुओं को मेहंदी लगवाई गयी। कथा वाचक भागवताचार्य भरत पांडेय जी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कहते हैं कि भगत उनको अपना सब समर्पण कर दे, आगे के बंधन वह स्वयं खोल देंगे। प्रभु ने बाल्यकाल में ही कालिया वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठा कर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया। गोकुल में गोचरण किया तथा गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म लेकर भी जो व्यक्ति पाप के अधीन होकर इस भागवत रुपी पुण्यदायिनी कथा को श्रवण नहीं करते तो उनका जीवन ही बेकार है और जिन लोगों ने इस कथा को सुनकर अपने जीवन में इसकी शिक्षाएं आत्मसात कर ली हैं तो मानों उन्होंने अपने पिता, माता और पत्नी तीनों के ही कुल का उद्धार कर लिया है।. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने गौवर्धन की पूजा करके इद्र का मान मर्दन किया। भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने का साधन गौ सेवा है। श्रीकृष्ण ने गो को अपना अराध्य मानते हुए पूजा एवं सेवा की। और गो की सेवा करने वाला गोसेवक कभी निर्धन नहीं होता। श्रीमद्भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन है। यह कथा बड़े भाग्य से सुनने को मिलती है। इसलिए जब भी समय मिले कथा में सुनाए गए प्रसंगों को सुनकर अपने जीवन में आत्मसात करें, इससे मन को शांति भी मिलेगी और कल्याण होगा। कलयुग में केवल कृष्ण का नाम ही आधार है जो भवसागर से पार लगाते हैं। परमात्मा को केवल भक्ति और श्रद्धा से पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन इस संसार का नियम है यह संसार परिवर्तनशील है, जिस प्रकार एक वृक्ष से पुराने पत्ते गिरने पर नए पत्तों का जन्म होता है, इसी प्रकार मनुष्य अपना पुराना शरीर त्यागकर नया शरीर धारण करता है।
भागवत कथा में भगवाताचर्य ने लोगों को उपदेश देते हुए कहा मानव के कष्ट हरण करने के लिए भगवान ने अनेक लीलाएं कीं, काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार ही शरीर के शत्रु हैं। भक्ति की शक्ति अथवा सत्संग के प्रभाव से इन पर काबू पाया जा सकता है। सत्संग रूपी कथा अमृत जीवन से परिवर्तन आता है। भागवत कथा जीने की कला सिखाता है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की कला सत्संग के प्रभाव से मिलते हैं. यदि व्यक्ति धर्म का आचरण करता है, तो धर्म द्वारा अर्जित अर्थ से धन से अपनी कामनाओं की पूर्ति करता है, तो उसकी सहज मुक्ति होती है, लेकिन अधर्म से कमाए धन से जीव तामसिक वृद्धि होती है।काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार ये तीनों नरक गामी बनाता है। कथा के पश्चात् छप्पन भोग लगाया गया एवं लोगों ने संगीतमयी कथा पर जमकर नाचे एवं भगवाताचार्य ने लोगों से अनुरोध किया ज्ञान यज्ञ के कुछ दिन ही शेष हैं। इस लिये ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग पधार कर ज्ञानयज्ञ का लाभ लें और जीवन को सफल बनाए। श्रीमद्भागवत सप्ताह के पांचवे दिन नटखट बाल गोपाल की झांकी दिखाई गई व गोवर्धन पूजा की गई। कौन सी ने मार दियो री टोना, मेरा मचल्यो श्याम सलोना भजन पर श्रद्धालु जमकर झूमे।
श्रीमद्भागवत सप्ताह के छठे दिन रुक्मणी विवाह होगा। मंदिर प्रमख सरोज बावा ने बताया कि शनिवार को बैसाखी मनाई जाएगी। सुबह 6 बजे हवन यज्ञ होगा और फिर श्रीमद्भागवत की पूर्णाहुति व सत्संग होगा। दोपहर को भंडार प्रसाद होगा। मंच संचालन दर्शना पाहवा ने किया। इस अवसर पर बक्शीलाल ठकराल, एडवोकेट सुरेंद्र राजपाल, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के संगठन सचिव रमेश भूटानी, सब्जी मंडी व्यापारी एसोसिएशन के उपप्रधान नरेश रखेजा, मोहित ठकराल, विश्वास अरोड़ा, अशोक धमीजा, गुलशन मक्कड़, रमेश महता, रिंकल अनेजा, सुभाष पाहवा, काशीराम चुघ, डॉ राजेंद्र भयाना, मोहनलाल भाटिया, सतीश खुराना,रामजीलाल हांडा, देवराज खट्टर, कृष्ण महता, एसडी कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल सुनीता चराया, योगिता पुष्करणा आदि श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

बैसाखी पर्व पर यमुना के पानी से होगा स्नान

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,
तीर्थ स्थान मंदिर श्री लक्ष्मण चौतरा में चल रहे बैसाखी पर्व पर इस बार यमुना के जल से स्नान होगा। इस बार मंदिर के सामने भ रही चेतंग नहर  में यमुना का पानी आया है। लोगों की श्रद्धा को देखते हुए सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है। 14 अप्रैल को बैसाखी के दिन सुबह 4 बजे से शुभ स्नान शुरू होगा।
मंदिर प्रमुख सरोज बावा ने बताया कि बैसाखी पर्व पर प्रात काल स्नान व बच्चों के मुंड़न संस्कार का महत्व है। बैसाखी पर्व के लिए मंदिर के सामने स्थित चेतंग नहर में पानी रहता है। इस बार नहर में पानी 9 अप्रैल को समाप्त होना था। पानी के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क किया गया। जिसपर बैसाखी पर्व के लिए यमुना का पानी छोड़ा गया है। लोगों की श्रद्धा को देखते हुए सिंचाई विभाग द्वारा 14 अप्रैल को बैसाखी के दिन तक पानी छोड़े जाने का आश्वासन दिया गया है। बता दें कि चेतंग नहर यानी की हिसार मेजर डिस्ट्रीब्यूटरी में भाखड़ा का पानी आता है।

फुलों के साथ किया श्रद्धालुओं ने भगवान श्री कृष्ण का स्वागत

सिटी फर्स्ट न्यूज़ हांसी,

तीर्थ स्थान मंदिर श्री लक्ष्मण चौतरा में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा एवं उत्साह पूर्वक मनाया गया। कथा स्थल जय कन्हैया लाल की जय से गूंजायमान हो उठा। विभिन्न क्षेत्र से पहुंचे श्रद्धालु भाव विभार हो कर नाचने लगे।भागवताचार्य भरत पांडेय ने कहा कि हमें हर दिन उत्सव के रुप में मनाना चाहिए। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए धर्म,अर्थ,काम व मोक्ष की महता पर प्रकाश डाला। उन्होने बताया कि 84 लाख योनियां भुगतने के पश्चात मानव देह की प्राप्ति होती है। इसलिए इस देह को उपयोग व्यर्थ कामों मे ना करके जनकल्याण व ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दे। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का अवतार तब होगा जब आप सत्य निवेशी बनेंगे। अर्थात आपको सत्य की साधना करनी पड़ेगी। मां देवकी ने सत्य की साधना की। सत्य की साधना कष्टदायी हो सकती है,लेकिन इसके फल के रूप में हमें श्रीकृष्ण ही प्राप्त होंगे। वह हमारे जीवन को आनंद से भर देंगे। भगवान कृष्ण सभी समस्याओं का समाधान हैं। उनके मार्गदर्शन में जीवन अगर चलने लगा तो जीवन का हर मार्ग आनंद से भर जाएगा। प्रभु कृष्ण भक्तों के प्रार्थना रूपी निर्मल झील में प्रतिदिन स्नान करते हैं।
प्रार्थना की विधि बताते हुए कहा कि प्रार्थना में भाषा की प्रधानता नहीं होती है। प्रार्थना तो भाषा शून्य होती है, लेकिन इसके लिए भाव जरूरी है। इस दौरान नंद बाबा व टोकरे वाले कन्हैया की झांकी दिखाई गई।  इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण की जीवंत झाकियां सजाई गईजिसे देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे।
नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, जन्म लियो कान्हा ने जैसे भजनों पर श्रद्धालु नृत्य करने लगे। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस मौके आयोजित हरिनाम संकीर्तन में श्रद्धालु झूम उठे। चौथे दिन शकुंतला खुराना ने ज्योति प्रज्जवलित की। मंच संचालन दर्शना पाहवा ने किया। इस दौरान बक्शीलाल ठकराल, भाजपा नेता राकेश भाटिया, राजीव शर्मा, रमेश महता, अजय कंबीरी, देवराज खट्टर, सतीश अनेजा, कृष्ण महता, रामजीलाल हांडा अन्य कई श्रद्दालुगण उपस्थित रहे।

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